PYD-Ongoing

सूतोत्तर

 

चालू अनुसंधान परियोजनाएं :

1) शीर्षक : कॉस्‍मेटिक अनुप्रयोगों के लिए रेशम सेरिसिन का गुण निर्धारण

इसमें शामिल वैज्ञानिक : एम ए जोसेफ, एस.ए.हिप्‍पर्गी, सुभाष वि .नायिक और एम.के घोष

अनुमानित परिणाम:-विगोंदित लिकर (-एच टी एच पी – प्रक्रिया) से सेरिसिन के बड़े पैमाने पर अलगाव के लिए उपयुक्‍त पद्धति का विकास और कॉस्‍मेटिक अनुप्रयोगों के लिए गुण निर्धारण होगा।

2. शीर्षक : एंजाइम (प्रकिण्‍व) का प्रयोग करते हुए तसर रेशम वस्‍त्र का जैव परिष्‍करण।

इसमें शामिल वैज्ञानिक : ब्रोजेश्‍वरी दास, के. जगनाथन, नवीन वी पड़की और श्रीनिवासा

अनुमानित परिणाम :- प्राकृतिक आकर्षक रंग और अद्वितीय/ अनुपम आकर्षण के बावजूद छूने पर खुरदरा और कमजोर आयामी स्थिरता के कारण तसर रेशम का अनुप्रयोग सीमित है। एंजाइम सहित तसर रेशम की जैव परिष्‍करण से इस क्षेत्र में प्रतिकूल प्रभाव पड सकता है। इससे प्राकृतिक तसर के जैविक स्थिति को बनाए रखने में सहायता मिलेगी जिससे संबंधित ग्राहक को बाजार मांग आकर्षित कर सकता है और फलस्‍वरूप रोजमर्रे के परिधानों में तसर रेशम का अच्‍छा प्रभाव होगा।

3. शीर्षक : रेशम वस्‍त्रों को धोकर पहनने के लिए सहज (ईजिकेयर) फिनिश विकसित  करना।

इसमें शामिल वैज्ञानिक : जगनाथन के, नवीन वी पडकी और ब्रोजेश्‍वरी दास

अनुमानित परिणाम :- वर्तमान में रेशम वस्‍त्र, मुख्‍य रूप से साडियों और परम्‍परागत पहनावे के लिए प्रयोग किया जाता है। रोजमर्रे के परिधानों में अनौपचारिक पोशाक, अर्ध-औपचारिक और औपचारिक मुख्‍य रूप से सूती और पोलिस्‍टर आधारित वस्‍त्रों का उपयोग होता है। रेशम की आसानी से देखभाल न होने के कारण वह अपनी मांग को बढ़ा नहीं पा रहा है। रेशम की आसानी से देखरेख (ईजी केयर) की वृत्ति बढ़ेगी तो इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत मांग बढ़ सकती है और फलस्‍वरूप रोजमर्रे के परिधानों में रेशम की अच्‍छी मांग हो सकती है।

4. शीर्षक : वस्‍त्र सामग्रियों के लिए सेरिसिन आधारित नैनों फिनिश को विकसित करना

इसमें शामिल वैज्ञानिक : ब्रोजेश्‍वरी दास, एम.ए. जोसेफ, सुभाष वि नायिक, रंगम राजखोवा, ज़ुंगाई वॉंग (डैकिन यूनिवर्सिटी,  ऑस्‍ट्रेलिया)

अनुमानित परिणाम :-

  •          सूती, पोलिस्‍टर और रेशम वस्‍त्रों के लिए सेरिसिन पर आाधारित नैनो फिनिश को विकसित करना
  •          विकसित सेरिसिन आधारित नैनो फिनिश से प्रति सूक्ष्‍म जैविक, आग अवरोधक यूवी प्रतिरोध और उत्‍तम अवचूषण वस्‍त्र उत्‍पाद।

5. शीर्षक : रेशम वस्‍त्रों का फोटो अवक्रमण का अध्‍ययन

इसमें शामिल वैज्ञानिक : एस.ए. हिप्‍पर्गी, के.जगनाथन, जी. तिम्‍मा रेड्डी, लू सून रंगम राजखोवा, ज़ुंगाई वॉंग (डैकिन यूनिवर्सिटी, ऑस्‍ट्रेलिया) और केट  मिलिंगटन (सीएसआईआरओ, ऑस्‍ट्रेलिया)

अनुमानित परिणाम :-

  •       विभिन्‍न रेशम वस्‍त्रों के फोटो अवक्रमण की विशेषताएं (डाटाबेस)
  •       रेशम वस्‍त्रों में रासायनिक और भौतिक परिवर्तनों के संबंध में यूवी अवक्रमण प्रक्रिया का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
  •       रेशम वस्‍त्रों के यूवी प्रतिरोध में सुधार लाने के लिए उपयुक्‍त परिसज्‍जा (फिनिशिंग) उपचार
  •       इंजीनियरिंग उपयुक्‍त रेशम वस्‍त्र/ उत्‍पाद के लिए उत्‍तम यूपी एफ के साथ ब्‍लू प्रिंट उपलब्‍ध कराया जा सकता है।

6. शीर्षक : रेशम यूनियन (पूर्वादिनांकित) वस्त्र की विशेषताएं और मूल्‍यांकन

इसमें शामिल वैज्ञानिक : जमीला खातून, के जगनाथन, एम.के. घोष और सुभाष वि  नायिक

अनुमानित परिणाम :-

  • इस परियोजना से दी गई सूचना से विशिष्‍ट अंतिम उपयोगार्थ रेशम यूनियन (पूर्वादिनांकित) वस्‍त्रों के प्रभावी उत्‍पादन में वस्‍त्र निर्माताओं के लिए मार्गदर्शों सिद्धांत उपलब्‍ध होंगे।
  • इसका परिणाम यह होगा कि परम्‍परागत रेशम वस्‍त्रों की रेशम वस्‍त्र तुलना में आरामदायक और परिधान संबंधी गुणों से पूर्ण होगा।

7. शीर्षक : अंतर्राष्‍ट्रीय गुणवत्‍ता भारतीय रेशम का उपयोग करते हुए विविध रेशम बुनाई उत्‍पाद / कपडों को विकसित करना

इसमें शामिल वैज्ञानिक :- के.जगनाथन, जमीला खातून, एस.ए. हिप्‍पर्गी, शिवकुमार के.पी, पी3डी और निफ्ट  टी

अनुमानित परिणाम :-

  • घरेलू और अंतराष्‍ट्रीय बाजार की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए उच्‍च गुणवत्‍ता शहतूत द्विप्रज रेशम का प्रयोग करके विविध रेशम बुनाई उत्‍पाद / कपड़े विकसित किए गए।
  • उत्‍तम किस्‍म के रेशम बुनाई उत्‍पादों से निर्माताओं को बेहतर (उत्‍तम) मूल्‍य वसूली होगी और गुणवत्‍ता कच्‍चा रेशम के धागाकारकों को मूल्‍य स्थिरता लाते हुए कच्‍चे रेशम की मांग को सुनिश्चित करेगी।
  • तिरुपुर के बुनाई उद्योग में प्रगति जिससे अधिक रोजगार के अवसर मिलेंगे और तदुपरांत जिससे देश का आर्थिक विकास होगा।

8. शीर्षक : रेशम और रेशम सम्मिश्रित सूतों का विकास और विशेषताएं

इसमें शामिल वैज्ञानिक : श्रीनिवासा, प्रकाश एन. भट्ट, जमीला खातून, एस.ए हिप्पर्गी और ब्रोजेश्‍वरी  दास

अनुमानित परिणाम :-

  • रेशम और रेशम सम्मिश्रित सूतों को तैयार करने के लिए श्रेष्‍ठ प्रक्रिया मापदण्‍ड
  • रेशम और रेशम सम्मिश्रित सूतों की और रेशम सम्मिश्रित सूत और विविध रेशम की किस्‍मों की संरचनात्‍मक, सुदृढ़ प्रयोजनमूलक विशेषताओं का डाटाबेस।

अन्‍वेषणात्‍मक अध्‍ययन:-

  • हथकरघे के लिए हुक चयन इलैक्‍ट्रानिक यंत्रावली का विकास
  • दाबीकृत (प्रशराइज्‍ड) एरी कोसा विगोंदन मशीन का डिजाइन एवं विकास
  • अल्‍प खर्चे, पर्यावरण हितैषी रेशम रंगाई/ रंजन प्रौद्योगिकी का विकास
  • मल्‍टी ट्विष्‍ट – फॉर-वन ट्विस्टिंग मशीन (एमएफओ) का विकास
  • स्‍वदेशी एमवी, बीवी और आयात रेशम का उपयोग करते हुए हथकरघे, बिजलीकरघा और रेपियर करघा पर तैयार वस्‍त्रों के मूल्‍यांकन पर अध्‍ययन
  • रेशम मुद्रित वस्‍त्रों पर मैकनिकल फिनिषिंग पर अध्‍ययन
  • भारत में करघे तैयार शहतूत कच्‍चे रेशम वस्‍त्रोंके लिए पर्यावरण हितैषी सेरिसिन निर्धा‍रण प्रौद्योगिकी का विकास