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हमारे बारे में

 

केरेप्रौअसं देश का एकमात्र अनुसंधान संस्थान है, जो रेशम प्रौद्योगिकी से संबंधित अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए समर्पित है । केरेप्रौअसं को  केन्द्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वर्ष 1983 में स्थापित किया गया था ।  तब तक, रेशम प्रौद्योगिकी देश के रेशम उत्पादन अनुसंधान संस्थानों में एकमात्र प्रभाग के रूप में थी । रेशम उद्योग के मांग पक्ष पर अधिक जोर देने के लिए जरूरत को देखते हुए, केरेप्रौअसं की स्थापना सही दिशा में एक पहला कदम था । आज, केरेप्रौअसं भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त देश के वस्त्र अनुसंधान संघों में से एक है :-

अधिदेश :
• गुणवत्ता में सुधार
• उत्पादकता में सुधार
• उद्योग के लिए सेवाएँ
• उद्यम विकास
• बाजार सूचना का प्रचार

उद्देश्य:
• रेशम उत्पादों जैसे कच्चा रेशम, स्पन रेशम तथा रेशम वस्त्र की गुणवत्ता में सुधार करना ।
• उत्पादन इकाइयों में प्रक्रिया व गुणवत्ता नियंत्रण के उपायों को आरंभ करना तथा  विकास करना ।
• प्रक्रिया तथा मशीनरी मानकीकरण के माध्यम से उत्पादन क्षमता में सुधार करना ।
• धागाकरण, कताई,  बुनाई तथा आर्द्र प्रक्रमण की उपयोगी मशीनरी में सुधार करना ।
• बेहतर लाभ के लिए द्वि – उत्पादों का उपयोग बढ़ाना ।
• प्रशिक्षण, सबको लेकर चलने की कुशलता, प्रौद्योगिकी तथा प्रबंधन प्रदान करना ।
• उद्योग के लिए तकनीकी और परामर्शी सेवाएं प्रदान करना ।
• राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार कोसों, तन्तु, धागों, वस्त्रों, रंगों, रसायनों तथा जल के
परीक्षणों की सेवाएं प्रदान करना ।
• विभिन्न योजनाओं द्वारा प्रौद्योगिकी को स्थापित करना ।
• विभिन्न क्षेत्र पारस्परिक कार्यक्रम द्वारा अनुसंधान परिणाम का प्रचार करना ।
• प्रौद्योगिकी हस्तांतरण हेतु उत्पादन इकाइयों को अपनाना ।
• नए उद्यम स्थापित करने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन / सहायता प्रदान करना,
• उत्पादों, प्रक्रियाओं, प्रौद्योगिकी, मशीनरी, घरेलू और निर्यात बाजार के बारे में ऑन लाइन जानकारी
प्रदान करना ।
उद्योग:
रेशम उद्योग कई कारणों से अद्वितीय है । रेशम उद्योग कोसों जैसे कृषि उत्पादन पर आधारित है जो प्रकृति में अत्यधिक परिवर्तनीय है ।  अत्यधिक श्रम युक्त, कुटीर आधारित, विकेन्द्रीकृत और अत्यधिक पारंपरिक  उच्च मूल्य तथा कम ढेर से युक्त है । अन्य वस्त्र क्षेत्रों के लिए लागू दृष्टिकोण रेशम उद्योग के लिए पूर्णतया लागू नहीं है और शायद यह स्पष्ट करता है कि देश में स्थापित वस्त्र अनुसंधान संस्थानों द्वारा रेशम पूरे वस्त्र तंतु के रूप में अधिक अनुसंधान क्यों नहीं किया गया है, इस प्रकार रेशम मात्र के लिए विशेष रूप से अनुसंधान संस्थान की जरूरत पड़ी । रेशम उद्योग की प्रकृति बिल्कुल जटिल और पेचीदा है । इसकी विभिन्न शाखाएं हैं – जैसे रेशम धागाकरण, रेशम प्रिपरेटरी व बुनाई,  रेशम निटिंग, विगोंदन, रंगाई, छपाई, परिष्करण को समाविष्ट कर रेशम आर्द्र-प्रक्रमण इसके अलावा व्यापार अनुसंधान पद्धति,  निर्यात, वस्त्र निर्माण व मशीनरी निर्माण में गौण सहयोग भी है ।

केरेप्रौअसं में केंद्रित अनुसंधान व्यापारिक रूप से प्रसिद्ध रेशम के सभी चार किस्मों जैसे : शहतूती, तसर, मूगा और एरी से संबंधित हैं । सभी समानताओं के बावजूद  गैर शहतूती रेशम शहतूती रेशम से भिन्न है  जिससे अलग-अलग तकनीकी, आर्थिक तथा सामाजिक क्षेत्रों में मौजूद स्थितियों के तहत अलग ग्रहणीय हस्तक्षेप की जरूरत महसूस होती है । मुख्य संस्थान बेंगलूरु जो  देश में रेशम की राजधानी है, में स्थित है । समय की अवधि के दौरान, केरेप्रौअसं  ने पूरे देश भर में विभिन्न महत्त्वपूर्ण रेशम समूहों के बीच 25 उप इकाइयों की स्थापना की है जो प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए माध्यम के रूप में सेवारत है । विशिष्ट अधिदेश पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उप इकाइयों की तीन व्यापक श्रेणियां हैं : (1) प्रदर्शन व तकनीकी सेवा केन्द्र (प्रवतसेके) (2) रेशम अनुकूलन व  परीक्षण गृह (रेअपगृ) तथा  (3) वस्त्र परीक्षण प्रयोगशाला (वपप्र) ।

उप इकाइयां :
प्रवतसेके को  अपने-अपने क्षेत्र में रेशम उत्पादन समूहों (धागाकरण और बुनाई) को तकनीकी सेवाएं प्रदान करने हेतु अधिदेश है । वे प्रदर्शनों, अन्योन्यक्रिया, प्रशिक्षण, समस्या का निवारण, गुणवत्ता तथा उत्पादकता में सुधार प्रदान करने के अलावा कार्य विधियों में सुधार के माध्यम से प्रौद्योगिकी के प्रसार के व्यापक पहलुओं को शामिल करते हैं । उनके पास धागाकरण तथा न्यूनतम गुणवत्ता परीक्षण के लिए संरचना है । प्रवतसेके में पर्याप्त अनुभव एवं तकनीकी ज्ञान वाले योग्य कर्मचारी का छोटा दल है । वे क्षेत्र में रेशम उद्योग को विकसित करने के लिए सकारात्मक प्रभाव सृजित करने में  सक्षम हैं । सफलता की कहानियां  क्षेत्र में डी सी आई एस सी द्वारा किए गए परिवर्तनों के बारे में बोलती है ।

रे अ प गृ के पास कच्चे रेशम तथा ऐंठित रेशम में गुणवत्ता आधारित मूल्य निर्धारण के अनुशासन के अलावा निर्माताओं तथा खरीदारों के बीच गुणवत्ता बोध मन में बैठाने के लिए अनन्य दायित्व है । किसी भी निर्माण क्षेत्र की प्रगति काफी हद तक गुणवत्ता पर प्रदान किए गए महत्त्व पर निर्भर करती है । यह एक कठिन कार्य था, जो विक्रेता बाजार का दर्जा दिया है । आपूर्ति से अधिक मांग, जिससे गुणवत्ता को नजरअंदाज किया जाता है । प्रारंभ में एक चरण था, जिसमें गुणवत्ता के महत्व पर लोगों को शिक्षित करने की दिशा में लगातार प्रयास करना पड़ा, नि: शुल्क परीक्षण सेवाएं प्रदान करने के बावजूद भी वे अपने नमूने परीक्षण कर पाने के लिए प्रेरित नहीं थे, अब यह गर्व की बात है, हमारे रेअपगृ की दृढ़प्रतिज्ञा से लाभांश भुगतान किए गए हैं । अभी परीक्षण हेतु चार्ज करने के बावजूद  परीक्षण के लिए बढ़ती मांग पूरा करने के लिए कोई भी प्रयास नहीं छोड़ा है ।

पर्यावरण और पारिस्थितिकी विचार ने  उत्पादकों, व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं के लिए बढ़ती हुई महत्व को  ग्रहण किया है. कई देशों, विशेष रूप से यूरोपीय संघ में पर्यावरण और पारिस्थितिकीय नियम का  त्वरित विकास किया गया है । हालांकि यह मुख्य रूप से वस्त्र उद्योग के लिए विकसित देशों और उनके पारिस्थितिक मापदंड में पर्यावरण की रक्षा करता है, यह अंतरराष्ट्रीय स्तर के उत्पादों पर प्रभाव जारी रखेगा । यूरोपीय संघ पर्यावरण लेबलिंग योजना की सफलता सुनिश्चित कर रहा है । इसके आलोक में,  भारत सरकार के लिए यह अनिवार्य हो गया कि निर्यात व्यापार को सुरक्षित करने के लिए पारिस्थिति मानकों का परीक्षण हेतु पर्याप्त संरचना का सृजन करे । केरेप्राअसं  ने इस प्रकार मुख्य संस्थान को मिलाकर चार केन्द्रों पर वपप्र की स्थापना की जो रेशम वस्त्र के भौतिक, रासायनिक तथा पारि-पैरामीटर परीक्षणों की जरूरतों को पूरा करता है । भारत सरकार से समय पर की कार्रवाई वास्तव में वस्त्र उद्योग के लिए विशेष कर रेशम उद्योग के लिए वरदान है ।

मुख्य संस्थान:

मुख्य संस्थान को इस प्रकार संरचित किया गया जिसमें कार्यात्मक क्षेत्र पर विधिवत् जोर दिया   गया । धागा उत्पादन, वस्त्र गठन, डिजाइन, आर्द्र-प्रक्रमण, प्रशिक्षण, विस्तार और बाजार सूचना के प्रसार के सभी पहलुओं के अनुसंधान के बारे में संबंधित विभाग जानकारी देने में सक्षम है । मुख्य संस्थान के विभिन्न विभागों, केरेप्राअसं के उप-इकाइयों और राज्य सरकार के विभागों के अनुसंधान एवं तकनीकी समन्वय, अनुसंधान व तकनीकी समन्वय कक्ष को सौंप दिया गया है । रेशम उत्पादन राज्यों का विषय है  और केन्द्रीय रेशम बोर्ड पर  पूरे देश की जिम्मेवारी है, इसे सुनिश्चित करने के लिए वह भरपूर समन्वय का प्रयास करता है कि इस उद्योग के विकास के लिए एक-दूसरे की गतिविधियों को सम्मान मिले । संस्थान के अनुसंधान और विकास, प्रशिक्षण और विस्तार कार्यकलापों में  प्रशासन,  भंडार और लेखा के समर्थित विभागों द्वारा सहायता दी जाती है ।